गली का
आख़िरी घर
बंद था
वर्षों से
तेज धूप
फिर बारिश
मोटी दरारें
दीवारों पर…
कौन था यहाँ
नहीं पता
आधुनिक घरों
में क़ैद
आज के लोग
‘रील’ बनाते
नये थे वो…
पुराने ताले को
बार-बार ऐंठते
अधेड़ उम्र के
चार-पाँच
नया बोर्ड
नया नाम
उपलब्धि पर
गर्व करता
नया ‘स्वामी’…✍
-अविचल मिश्र
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